Friday, April 30, 2010

शोभा यात्रा

हमारे प्रदेश के महामंत्री ने सभी सेना पतियों कि आपातकालीन बैठक बुलवायी है , सुना है महाराजा के सबसे बडे और शक्तिशाली सिप्पहसालार पधार रहे है ।

महामंत्री : हम चाहते है के सभी जिले अपनी शक्ती का प्रदर्शन करे । हम चाहते है कि इस दरबार मे शक्ती कि शोभा यात्रा निकाली जाये । हमने इस वर्श जो जो नया किया है उसको बढा चढा के बताया जाये ।

सेना पती १ : पर महामन्त्री जी, हमने तो इस वर्ष कुछ नया किया ही नही. सार वर्ष तो हमने केवल राजनिति करने मे ही लगा दिया । हमारी फ़ौज तो वैसे भी राज्य कि सुरक्षा मे व्यस्त थी, उनसे कुछ नये कि उम्मीद करना गलत होगा.

महामंत्री : अब हमे आपको यह भी सिखाना पडेगा की पुराने काम को नया बनाके कैसे पेश किया जाता है. हम कुच नही जानते । काम किया हो या नही किया हो, शोभा यात्रा तो निकाली जायेगी । आखिर हमे भी उन्हे बताना है के हम भी कुछ कार्य करते है ।

सेना पति २ : पर महामन्त्री जी, इसमे तो हमें अपनी सारी फ़ौज लगानी पडेगी । छोटे बडे सभी सिपाही. फ़िर राज्या की सुरक्षा का ध्यान कौन रखेगा ।

महामंत्री : हमारी सलाह मानें तो बढे सिपाहियों को लगायें, इससे उनका मनोबल गिरेगा और वो दूसरे राज्यों कि और पलायन करेंगे । हम उनके बदले मे दो और सिपाही ले लेंगे । एक तीर से दो निशाना, कोई मुझसे सीखे ये तराना ।

सेना पति ३ :महाराज नीति तो अच्छी है, मगर हमें बढे सिपाहीयों कि आवश्यक्ता पडी तो ? वो तो हमारी शान हैं ।

महामंत्री : मुर्खों तुम्हारी इज़्ज़त इसमें है कि तुम्हारे पास कितने सिपाही हैं ना की कितने बढे है । वैसे भी हमारे राज्य मे सुरक्षा का काम ही कहाँ है । जाओ और शोभा यात्रा कि तैयारी करो ।

1 comment:

Unknown said...

are ye to bataya jaye ki Shobha yaatra rahi kaisi....Maharaj ne kuchh inam diya ya nahi