me and me
Monday, June 03, 2013
Ghazal
कौन जाने कहाँ यह रात ले जाये
कहाँ मेरी उनसे यह मुलाकात ले जाये ॥
अब तक जो अहसास दफ्न थे दिल में
जाने कहाँ उसे मेरे जज़्बात ले जाये ॥
तूफ़ान तो दिल में वहाँ भी होगा, डर है
कहीं और, ना हमारे अघलात ले जाये ॥
(अघलात = Mistakes)
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